Cafè Reminiscence

Poem-Story

हरे काँच की चूड़ियाँ

उस दिन कुछ कागजात ढूंढते हुए वो पुराना लकडी का बक्सा मिला , खोला तो उसमे दो काँच की चूड़ियो के टुकड़े मिले हरे काँच की , तो सब काम छोड़ कर बस बक्सा लेकर बैठ गया , और भूल…

कशमकश

आखिर अरूंधति ने पूछ ही लिया की क्या बात है कुछ खोयी हुई हो , हुआ यूँ की आश्विन अपने एक दोस्त और उसकी वाइफ अरूंधति जो मेरी भी अच्छी  दोस्त है के साथ हम यहाँ हिल स्टेशन पर घूमने…

सपना : Dream

एक   सपना  जन्म् ले  रहा  हे  ,  बरसों  तक  कहीं  दबा  पड़ा  था  , बीच  बीच  में  कभी  कभार  बाहर  आता  था   लेकिन  फिर  कहीं  खो  जाता  था . सपने  में  पानी  है  हरियाली  है   बड़े बड़े…

Barrish : बारिश

    कार ऐसी से जब दम घुटने लगा तो शहर के बाहर निकल पड़ा कल रात बारिश हुई थी हरियाली और खाली सड़क दिखी तो नंगे पांव उतर गया और पैदल ही चल पड़ा ,   तलाश कर रहा…