Cafè Reminiscence

Reminiscences

Barrish : बारिश

    कार ऐसी से जब दम घुटने लगा तो शहर के बाहर निकल पड़ा कल रात बारिश हुई थी हरियाली और खाली सड़क दिखी तो नंगे पांव उतर गया और पैदल ही चल पड़ा ,   तलाश कर रहा…

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काफी अरसे के  बाद जाना हुआ २५४ में , साफ़ सुथरा सा लगा , हरियाली हे लेकिन वो २ आम के  , अमरुद और नींबू के पेड़ अब नहीं रहे , दोपहर ,में गली के बच्चे पत्थर फेंकते होंगे ,बहुत…

कैसी हो तुम …….

धुन्दला सा याद हे चेहरा ,किसी नेटवर्क साईट  पर पिक्चर देखी थी कुछ समय पहले , सुन्दर सी थी , शायद पहले से ज्यादा , , लेकिन आँखों के भाव समज नहीं आये , खुश , उदास ,कोशिश तो करी…